यह मेरी असली सच्ची कहानी है जो मैं हमेशा से छिपाना चाहती थी, लेकिन अब दिल नहीं मान रहा। मेरा नाम स्नेहा है और मेरी उम्र 22 साल है। दोस्तों मेरे घर में मम्मी, पा…Free Sex Kahani

यह मेरी असली सच्ची कहानी है जो मैं हमेशा से छिपाना चाहती थी, लेकिन अब दिल नहीं मान रहा। मेरा नाम स्नेहा है और मेरी उम्र 22 साल है। दोस्तों मेरे घर में मम्मी, पापा, मुझसे छोटी मेरी बहन अनुष्का 21 साल की और मेरा भाई अर्णव है। वो हमारी फैमिली में सबसे छोटा है और हमारी फैमिली एक दूसरे से बहुत प्यार से रहती थी। कभी किसी से नहीं लड़ता और हम सभी में सिर्फ प्यार ही प्यार था। फिर एक दिन मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो पाप था लेकिन दुनिया की नज़रों में तो वो पाप ही था और वही पाप मैं आज आप सभी को विस्तार से बताने जा रही हूँ। मेरी चुत में वो पहली बार लंड घुसने की याद आज भी मुझे गीला कर देती हैFree Sex Kahani

दोस्तों कॉलेज में मेरी सभी फ्रेंड्स बहुत शैतान और बहुत बिगड़ी हुई थीं। उस कॉलेज का माहौल ही ऐसा था और वहाँ पर सीनियर्स और जूनियर्स सबके बॉयफ्रेंड थे लेकिन अभी तक मेरा कोई नहीं था और सब लोग एक दूसरे से दिन भर सेक्स संबंधित बातें करते रहते थे। और फिर मेरी भी धीरे-धीरे सबसे दोस्ती हो गयी और मैं भी धीरे-धीरे इसी रंग में ढलने लगी। हर दिन उनकी चुदाई की कहानियां सुनकर मेरी चुत में खुजली सी होने लगती थी।

फिर कुछ दिनों के बाद मुझे दो लड़कों ने प्रपोज भी किया लेकिन मैंने मना कर दिया। क्योंकि मुझे कोई ऐसा लड़का चाहिए था जो मेरी परवाह करे और मुझसे सच्चा प्यार करे और ऐसा अब इस दुनिया में परिवार के अलावा और नहीं मिल सकता था तो मुझे दूसरे जोड़ों को देखकर जलन होती थी। क्योंकि मुझे भी कोई चाहिए था जो मेरी चुत को प्यार से चोदे। मेरी कुछ फ्रेंड्स सेक्सी किताबें पढ़ती थीं और उनके पास सेक्स फिल्म का बहुत सारा हर तरह का बहुत अच्छा कलेक्शन था।

फिर मैं भी धीरे-धीरे सेक्स की आदि हो गयी थी। आप सभी जानते हैं कि जिनके पास कोई सेक्स करने के लिए नहीं होता वो ही ऐसी फिल्में देखते हैं और बाकी लोग सेक्स करते हैं वो इस फिल्म पर अपना टाइम खराब नहीं करते। दोस्तों मुझे सेक्स बुक्स और सेक्सी फिल्म की आदत पड़ गयी और अपनी चुत में उंगली भी करने लगी। रात भर लंड की कल्पना करके चुत में तीन-तीन उंगलियां डालकर झड़ती।

और अब यार मुझे किसी भी तरह असली लंड चाहिए था लेकिन उसके साथ सच्चा प्यार भी चाहिए था। और मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। मैं अब मेरे ही पापा और अपने छोटे भाई को अलग तरह से देखने लगी और मुझे लगा कि मैं यह कुछ ट्राई करूं लेकिन मुझे यह सब मुमकिन नहीं लगता था। भाई का लंड देखते ही मेरी चुत गीली हो जाती।Free Sex Kahani

दोस्तों वैसे मेरे पापा और छोटा भाई मुझसे बहुत अच्छी तरह से रहते थे और मुझे बहुत प्यार भी करते थे। और मुझे लगता था कि यह सब पापा के साथ तो बहुत मुश्किल है और ना मुमकिन भी है। तो मैंने सोचा कि क्यों ना अपने छोटे भाई अर्णव के साथ कुछ ट्राई किया जाए और मेरे मन में बहुत घबराहट तो थी। लेकिन वो सेक्स की तड़प से ज्यादा नहीं थी और मेरे दिमाग में अब सेक्स ही था और कुछ नहीं था। उसका मासूम चेहरा देखकर भी मेरी चुत में लंड घुसने की कल्पना करने लगती।

रात को हम तीनों साथ ही सोते थे और अर्णव मुझसे छोटा था इसलिए उसके साथ यह सब करना आसान था और मैंने तो बहुत दिनों से उसका लंड नहीं देखा था। और बचपन में तो बहुत बार देखा था और अब तो वो मुझे अपनी चुत के अंदर चाहिए था। मुझे पता नहीं कि इस उम्र में उसका लंड खड़ा होता होगा या नहीं। वैसे नॉर्मली आजकल लोग इस उम्र में मुठ मारने लग जाते हैं जैसा मैंने एक कहानी में पढ़ा था और फिर एक रात।Free Sex Kahani

मैं: अर्णव तुझे गणित में कुछ पूछना था ना तू आज मुझसे गणित में जो भी समस्या है तो वो सब पूछ लेना क्योंकि तीन दिन बाद तेरा एग्जाम है।

अर्णव: लेकिन दीदी मुझे तो नींद आ रही है।

मैं: नहीं अर्णव आज रात को दो चैप्टर्स खत्म करने पड़ेंगे।

अर्णव: ठीक है दीदी।

फिर मैंने उसको बहुत देर रात तक पढ़ाया और वो पढ़ते-पढ़ते मेरे बेड पर ही सो गया। उस समय गर्मी बहुत थी और उसने बनियान, बरमूडा पहना हुआ था और मैंने टी-शर्ट, कैप्री और जब सबको नींद आ गयी तब मैंने अर्णव के लंड को देखकर अपनी चुत में उंगली करना शुरू कर दिया, धीरे-धीरे अपनी उंगली को गोल-गोल घुमाती हुई, चुत की दीवारों को सहलाती हुई, और मेरी सांसें तेज हो रही थीं, गर्माहट फैल रही थी पूरे शरीर में, जैसे कोई आग लगी हो अंदर, चुत से रस बहने लगा

फिर मैं कुछ देर बाद एक बार तो झड़ गयी लेकिन मुझे उसके साथ कुछ करना था। लेकिन मुझे डर भी बहुत लग रहा था कि कहीं कुछ गलत हो गया तो और अगर उसने मम्मी, पापा को बता दिया तो क्या होगा। तो वो अब हर रोज रात को मेरे साथ बहुत देर तक पढ़ाई करता और मेरे बेड पर ही सो जाया करता था और मैं उसके लंड को देखकर ही अपनी चुत में उंगली करती थी, कभी उसकी जांघों की गर्मी महसूस करती, कभी उसके उभार को हल्का छूने की कोशिश करती, लेकिन अभी सिर्फ देखकर ही संतोष करती, लंड की नसें देखकर कल्पना करती कि ये मेरी चुत में घुस रहा है।

एक रात को मैंने थोड़ी हिम्मत करके उसका एक हाथ पकड़कर उसे धीरे से मेरी पेंटी के अंदर डाल दिया और सोने का नाटक किया और उसके कुछ ही देर बाद मैंने उसको जोर जोर से हिलाना शुरू किया और उसे डांटकर फटकार कर उठाया और उससे कहा कि अर्णव तेरा हाथ मेरी पेंटी में क्या कर रहा था और तुझे जरा सी भी शरम नहीं आती मैं तेरी बड़ी बहन हूं और तू मेरे साथ यह सब कर रहा था तो वो गहरी नींद में था इसलिए वो बहुत डरकर धीरे से उठ गया और उसने अपने हाथ को जल्दी से पेंटी से बाहर निकाल दिया। मेरी चुत उसके हाथ से गीली हो चुकी थी।

अर्णव: दीदी यह मैंने नहीं डाला मुझे माफ कर दो दीदी और अब ऐसा कभी नहीं होगा। मुझे नहीं पता यह कैसे हुआ प्लीज आप किसी को मत बताना माफ कर दो।

मैं: अर्णव तू बहुत बिगड़ गया है मैं सुबह होते ही मम्मी, पापा को सब बता दूंगी कि तू मेरे साथ क्या कर रहा था।

फिर वो मेरी यह बात सुनकर अर्णव जोर-जोर से रोने लगा और फिर मुझे उस पर दया आ गयी। तो मैंने उसे अपने गले से लगाकर चुप करवाया और मैंने उससे कहा कि ठीक है चल अब चुप हो मैं किसी को नहीं बताऊंगी तो वो मेरी यह बात को सुनकर एकदम चुप हो गया। और वो मुझसे बोला कि अब मैं आपके बेड पर कभी भी नहीं सोऊंगा। तो मैंने उससे कहा कि तुझे यही सोना पड़ेगा क्योंकि अगर तू नहीं सोया तो मैं मम्मी, पापा को सब कुछ बता दूंगी। और फिर दूसरे दिन मैंने उससे पूछा कि।

मैं: अर्णव तू इतना बिगड़ कैसे गया और तुझे कौन बिगाड़ रहा है और तुझे यह सब कौन सिखाता है।

अर्णव: दीदी मेरे दो तीन फ्रेंड्स हैं और वो सब बहुत गंदी गंदी बातें करते हैं शायद उनके कारण मुझसे ऐसा हो गया सॉरी दीदी।

मैं: कोई बात नहीं।

अर्णव: लेकिन प्लीज आप किसी को मत बताना।

मैं: ठीक है लेकिन मेरी एक शर्त है कि तू मुझे वो सब बताएगा जो तेरे फ्रेंड्स तुझे बताते हैं।

अर्णव: दीदी वो सब बहुत गंदी गंदी बातें करते हैं और वो सभी बातें मुझे आपको बताने में भी शरम आ रही है।

मैं: तू नहीं बताएगा तो फिर तू जानता है कि मैं क्या कर सकती हूं।

अर्णव: ठीक है दीदी मैं कल से आपको सब बातें बताऊंगा।

दोस्तों फिर धीरे-धीरे समय गुजरता गया और हम दोनों एक दूसरे से बहुत खुलने लगे और अब अर्णव मेरी हर बात मानने लगा था। मैं रात को उस पर पैर रखकर सोने लगी और अपने बड़े बड़े बूब्स उसके शरीर से छूने लगी और मैं जानबूझ कर कभी कभी पेंटी, ब्रा भी नहीं पहनती थी, रात में उसकी सांसों की गर्माहट महसूस करती, उसके शरीर की मर्दानी खुशबू सूंघती, और मेरी चुत गीली हो जाती सिर्फ सोचकर ही कि वो इतना करीब है, उसका लंड मेरी जांघों से टकरा रहा है।

एक दिन जब रात को मैं चुत में उंगली कर रही थी तो अर्णव जाग गया मेरी आंखें बंद थीं और वो मुझे देखकर बोला कि दीदी यह क्या कर रही हो।

मैं: अर्णव मुझे बहुत डर लग रहा है प्लीज तू मुझे एक बार हग करना और उस समय उंगली करते करते मैं झड़ने वाली थी इसलिए मेरी स्पीड भी अपने आप बढ़ चुकी थी, आह.. ह्ह.. आह.. मेरी सांसें तेज, चुत की नमी फैल रही थी जांघों पर, रस की चिपचिपाहट।

अर्णव: क्या हुआ ठीक है मैं करता हूं।

फिर मैंने भी उसको हग किया और मैं भूल गई थी कि मैंने पेंटी नहीं पहनी है मैं उस पर ही झड़ गयी और मैंने उसको मदहोशी में अपने दोनों पैरों के बीच में दबा लिया था और मेरी चुत का सारा पानी उसकी अंडरवियर पर निकल गया, गर्म रस की बौछार, चिपचिपा होकर उसकी जांघों पर लगा, और मैं आह्ह.. ओह्ह.. कर रही थी झड़ते हुए, चुत कांप रही थी।

अर्णव: दीदी आप पागल हो क्या आपने यह क्या किया।

मैं: चुपचाप रह सब सो रहे हैं और थोड़ा धीरे बोल वरना कोई उठ जाएगा।

अर्णव: दीदी लेकिन यह सब गलत है।

मैं: क्यों तूने जो उस दिन किया था क्या वो सही था।

अर्णव: दीदी मैं उस दिन नींद में था लेकिन आप तो जाग रही थीं।

मैं: क्या तुझे मेरे बूब्स देखने हैं।

अर्णव: दीदी आप पागल हो क्या आप मेरी बहन हो।

मैं: लगता है तेरी शिकायत मम्मी, पापा से करनी पड़ेगी।

अर्णव: यार दीदी आप तो मुझे बहुत ब्लेकमेल कर रही हो।

फिर मैंने उसके पास आकर उसके हाथ अपने बूब्स पर लगवा दिए। उसको पहले बहुत अजीब सा लगा लेकिन फिर उसने बोला कि दीदी अंधेरा बहुत है और मुझे यह देखना है कि यह कैसे होते हैं क्योंकि मैंने कभी नहीं देखे तो मैंने बोला कि तू चिंता मत कर मैं तुझे सुबह दिखा दूंगी। अभी तू इनको जोर से दबा और उसने वैसा ही किया और मुझे बहुत मजा आ रहा था, उसके हाथों की खुरदरी छुअन मेरे निप्पलों पर, वो कड़े हो गए, दबाते हुए आह.. ह्ह.. मेरी सांसें तेज, और मैं सोच रही थी कि कितना मासूम है लेकिन कितना जोश भरा, उसका लंड मेरी जांघ से टकरा रहा था।

वो मेरे बूब्स को जोर-जोर से दबा रहा था और मैं अपनी चुत में उंगली करके झड़ गई। दोस्तों उस दिन मैंने और कुछ नहीं किया और फिर उसके अगले दिन अर्णव मेरे पास आया और मुझसे बोला कि दीदी प्लीज मुझे आपके बूब्स दिखा दो तो मैंने कहा कि तू थोड़ा इंतजार कर जिस दिन जब हम दोनों घर पर अकेले होंगे तब मैं तुझे सब कुछ दिखा दूंगी। लेकिन रात को वो खुद मेरी टी-शर्ट में हाथ डालकर मेरे बूब्स को एक एक करके जोश में आकर दबाने, मसलने लगा तो मैंने उससे पूछा कि क्या तू इनको चाटेगा, चूसेगा उसने पहले तो शरमाई लेकिन फिर हां कह दिया और मैंने अपनी टी-शर्ट ऊपर की, उसके मुंह में अपना निप्पल दे दिया, वो चूसने लगा जैसे बच्चा दूध पीता है, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग, मेरी चुत फिर गीली हो गई।

यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”

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