यह मेरी बिल्कुल सच्ची कहानी है, वो कड़वा सच जो मैं आज तक किसी को नहीं बता पाई। मैंने इसे अपने दिल में दफन करके रखा था, पर अब लगा कि शायद लिख दूं तो बोझ कुछ हल्क…Antarvasna Stories

यह मेरी बिल्कुल सच्ची कहानी है, वो कड़वा सच जो मैं आज तक किसी को नहीं बता पाई। मैंने इसे अपने दिल में दफन करके रखा था, पर अब लगा कि शायद लिख दूं तो बोझ कुछ हल्का हो जाए। मेरा नाम प्रिया है, उम्र अभी 22 साल की है। हम राजस्थान के छोटे से शहर कोटा में रहते थे। घर में सिर्फ तीन लोग – मम्मी-पापा और मेरा बड़ा भाई राहुल। राहुल मुझसे चार साल बड़ा है, लंबा, चौड़ा कंधा, जिम जाता था, हमेशा टाइट टी-शर्ट में उसकी छाती और बाजू फटती हुई लगती थी। बचपन से हम बहुत करीब थे, पर 12वीं के बाद वो इंजीनियरिंग कॉलेज चला गया और दो साल हॉस्टल में रहा। जब वो छुट्टियों में घर आता तो मुझे बहुत लाड़ करता, रात भर बातें करते, फिल्में देखते। मुझे कभी खयाल भी नहीं आया कि वो मुझमें भाई से ज्यादा कुछ और देखता है।Antarvasna Stories

वो गर्मियों की छुट्टियां थीं, मई का महीना। मम्मी-पापा को अचानक गांव जाना पड़ा, दादी बहुत बीमार थीं। घर में सिर्फ मैं और राहुल भैया अकेले थे, पूरे दस दिन। पहला-दूसरा दिन तो सब नॉर्मल था। तीसरे दिन रात को बारिश शुरू हो गई, बिजली चली गई। घर में अंधेरा हो गया। भैया ने मोमबत्ती जलाई और बोले, “चल प्रिया, छत पर चलते हैं, बारिश में भीगते हैं।” मैंने हंसकर मना कर दिया, पर भैया ने जबरदस्ती मेरी कलाई पकड़ी और मुझे ऊपर खींच लिया। छत पर तेज बारिश हो रही थी। हम दोनों मिनटों में पूरी तरह भीग गए। मेरी सफेद कुर्ती चिपक गई थी, ब्रा साफ दिख रही थी। भैया की टी-शर्ट भी गीली होकर बदन से चिपक गई थी, उसकी छाती की मसल्स साफ उभर आए थे। वो मुझे देखता रहा, उसकी आंखों में कुछ अजीब सा था।

अचानक बिजली कड़की और मैं डर के मारे भैया से लिपट गई। भैया ने मुझे बहुत जोर से पकड़कर खड़े रहे। उनकी सांसें मेरे कान पर तेज-तेज लग रही थीं। मैंने महसूस किया कि उनका लंड मेरी जांघ से टकरा रहा था, बहुत सख्त और गर्म। मैं घबरा कर अलग हुई। भैया ने मेरी कमर पकड़कर वापस खींचा और फुसफुसाया, “प्रिया… तू कितनी सुंदर हो गई है… मैं तुझे देखता रहता हूं।” मैंने कुछ नहीं कहा, बस कांप रही थी। भैया ने मेरे गीले बाल कान के पीछे किए और मेरे होंठों पर अपना होंठ रख दिया। मैंने विरोध करने की कोशिश की पर भैया ने मुझे इतनी जोर से पकड़ रखा था कि हिल भी नहीं पा रही थी। उनका जीभ मेरे मुंह में घुस गया, वो मुझे चूमते रहे, बारिश में हम दोनों पूरी तरह भीग चुके थे।

फिर भैया ने मुझे गोद में उठाया और सीधा अपने कमरे में ले गए। दरवाजा लॉक किया, लाइट जलाई। मेरी कुर्ती उतार दी। मेरी ब्रा गीली थी, निप्पल साफ दिख रहे थे। भैया ने ब्रा का हुक खोला और मेरे बूब्स को बाहर निकालकर चूसने लगा। “आह्ह्ह भैया… नहीं… ये गलत है…” मैं रोते हुए बोली। भैया ने मेरे मुंह पर हाथ रखा और बोले, “शश्श… बस आज एक बार… मैं तुझे बहुत दिन से प्यासा हूं प्रिया… तेरी चुत मारना चाहता हूं।” ये सुनकर मेरे पैर कांप गए। भैया ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला, सलवार नीचे सरका दी। मेरी पिंक पैंटी पूरी गीली थी, चूत के रस से। भैया ने पैंटी भी उतार दी। मैं नंगी उनके सामने खड़ी थी। भैया ने अपना ट्रैक पैंट नीचे किया। उनका लंड बाहर आया – नौ इंच लंबा, बहुत मोटा, नसें उभरी हुईं, टोपा लाल और चमकदार। मैं डर गई, “भैया… इतना बड़ा… नहीं जाएगा…”

भैया ने मुझे बेड पर लिटाया, मेरी दोनों टांगें चौड़ी कीं और अपना मुंह मेरी चुत पर रख दिया। उनकी जीभ मेरी क्लिट पर घूमने लगी, चपचप चपचप… मैं तो जैसे पागल हो गई। “आह्ह्ह भैया… आह्ह्ह… क्या कर रहे हो… ऊईई मां…” मेरी कमर अपने आप ऊपर उठने लगी। भैया ने दो उंगलियां मेरी चुत में डालकर अंदर-बाहर करने लगे, साथ में जीभ से चाटते रहे। पांच मिनट में ही मैं झड़ गई, मेरी चुत से रस की बौछार निकली, भैया ने सारा रस चाट लिया। फिर भैया बेड पर लेट गए और बोले, “अब तू मेरे लंड को चूस।” मैं डरते-डरते घुटनों पर बैठी, उनका लंड हाथ में लिया – इतना मोटा कि मुट्ठी भी नहीं बन रही थी। मैंने टोपा मुंह में लिया, नमकीन स्वाद था। भैया ने मेरा सिर पकड़कर पूरा लंड गले तक ठूंस दिया। मैं खांसने लगी, आंसू निकल आए, पर भैया नहीं माने। ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गोंग गोंग… वो मेरा मुंह चोदते रहे।Antarvasna Stories

फिर भैया ने मुझे घोड़ी बनने को कहा। मैं चारों हाथ-पैर पर हो गई। भैया मेरे पीछे आए, अपना लंड मेरी चुत पर रगड़ा। “प्रिया… आज तू मेरी घोड़ी बनेगी… मैं तुझे असली मर्द की तरह चोदूंगा।” एक जोर का धक्का मारा। टोपा अंदर गया। मैं चीख पड़ी, “आअह्ह्ह्ह भैया… मर गई… फट गई चुत…” भैया ने मेरी कमर पकड़ी और पूरा लंड एक ही झटके में पेल दिया। मेरी सील टूट गई, खून निकला। मैं रोने लगी, पर भैया ने पीठ पर किस किया और धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। पहले दर्द था, फिर मजा आने लगा। भैया की स्पीड बढ़ी – ठपठप ठपठप ठपठप ठपठप… मेरी चूत से चपचप चपचप की आवाज आने लगी। भैया मेरी चुत मारते जा रहे थे। “कैसी लग रही है भाई की लौड़े की चुदाई प्रिया?” “आह्ह्ह भैया… बहुत मजा आ रहा है… और जोर से चोदो… आह्ह्ह ऊईई मां…”Antarvasna Stories

भैया ने मेरे बाल पकड़कर घोड़ी की तरह खींचे और तेज-तेज पेलने लगे। ठपठप ठपठप ठपठप… मेरी चुचियां लटककर हिल रही थीं। मैंने तीन बार झड़ लिया, मेरी टांगें कांप रही थीं। भैया फिर भी नहीं रुके। दस मिनट तक घोड़ी बनाकर चोदते रहे। फिर मुझे सीधा लिटाया, मेरी टांगें कंधे पर रखीं और मिशनरी में पेलने लगे। मेरी चुत से खून और रस मिलकर लंड को चिकना कर रहे थे। भैया की सांसें तेज थीं, “प्रिया… मैं तेरी चुत में ही झाड़ने वाला हूं… ले… ले मेरे रस की बौछार…” और गर्म-गर्म वीर्य मेरी चुत के अंदर भर गया। भैया मुझ पर लेट गए, हम दोनों हांफ रहे थे।

उस रात भैया ने मुझे चार बार चोदा। सुबह फिर चोदा। पूरे दस दिन हमने घर में कहीं कपड़े नहीं पहने। भैया जब चाहते मुझे घोड़ी बनाकर चोदते। किचन में खाना बनाते वक्त पीछे से लंड पेल देते। सोफे पर फिल्म देखते वक्त मेरे मुंह में लंड ठूंस देते। बाथरूम में नहाते वक्त मेरी गांड में भी उंगली डालकर तैयार करने लगे। दसवें दिन मम्मी-पापा आने वाले थे। आखिरी रात भैया ने मुझे बांधकर चोदा, मेरे हाथ बेड से बांध दिए, आंखों पर पट्टी बांध दी और पूरी रात चोदते रहे। सुबह मेरी चुत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं।

मम्मी-पापा आए तो सब नॉर्मल हो गया। पर अब जब भी मौका मिलता है, भैया मुझे चुपके से चोदते हैं। कभी कार में, कभी छत पर, कभी रात को मेरे कमरे में आकर। मैं अब उनकी चुदक्कड़ छोटी बहन बन चुकी हूं। मुझे पता है ये गलत है, पर मजा इतना आता है कि रोक नहीं पाती। भैया का नौ इंच का लौड़ा मेरी चुत की जान है

यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।

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